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रिटायरमेंट के लिए NPS या MF कौन-सा विकल्प है बेहतर, समझें

रिटायरमेंट के लिए NPS या MF कौन-सा विकल्प है बेहतर, समझें
Vandana Punj
Vandana Punj

लोग रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अलग-अलग निवेश विकल्पों में पैसे जमा करते हैं। नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) और म्यूचुअल फंड इनमें से ही एक हैं। दोनों ही लॉन्ग टर्म निवेश के विकल्प है। हालांकि एनपीएस और म्यूचुअल फंड दोनों कई कारकों जैसे-आपका वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और टैक्स बेनिफिट आदि पर निर्भर करते हैं। तो चलिए इनके बारे में जानते हैं और समझते हैं कि रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए किसमें निवेश करना आपके लिए बेहतर रहेगा:

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) क्या है?

एनपीएस सरकार समर्थित एक कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम है, जिसमें सरकारी या प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी मासिक या सालाना आधार पर पैसे जमा कर सकते हैं। आमदनी के हिसाब से 1,000 रु. की न्यूनतम राशि के साथ आप इसमें निवेश शुरू कर सकते हैं और 65 साल की उम्र तक इसे चला सकते हैं। रिटायरमेंट के वक्त जमाकर्ता को 60% पैसे मिलते हैं और बाकी 40% एन्युटी में जमा करवाना होता है। इसी के आधार पर जमाकर्ता को हर महीने पेंशन मिलती है। यानी जितनी ज्यादा रकम एन्युटी में लगाएंगे उतनी अधिक राशि आपको पेंशन के रूप में मिलेगी।

म्यूचुअल फंड (MF) क्या है?

म्यूचुअल फंड बाजार आधारित निवेश विकल्प है, जिसमें कई लोग मिलकर अपने पैसे निवेश करते हैं। इसमें कई सारे निवेशकों का पैसा एक जगह इक्ट्ठा करके उसे इक्विटी शेयर और स्टॉक, डिबेंचर, सिक्योरिटीज, बॉन्ड, बिल व अन्य मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट आदि में निवेश किया जाता है। निवेश एकमुश्त और मासिक किस्तों यानी सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) में किया जा सकता है। एकमुश्त निवेश करने के लिए अधिक पैसों की जरूरत होती है जबकि एसआईपी मात्र 500 रु. से भी शुरू किया जा सकता है।

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एनपीएस और म्यूचुअल फंड की तुलना

  • उद्देश्य: NPS खासतौर पर रिटायरमेंट के लिए तैयार किया गया है। इसमें जमा राशि को जमाकर्ता रिटायमेंट के बाद एकमुश्त या पेंशन के रूप में पैसे निकाल सकते हैं। जबकि म्यूचुअल फंड में शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निवेश किया जा सकता हैं।
  • टैक्स बेनिफिट: एनपीएस में कर अधिनियम 80(C), 80CCC(1) और 80CCD(2) के तहत 1.5 लाख रु. तक टैक्स में छूट तो मिलता ही है कर अधिनियम 80CCC(1B) के जरिए 50,000 रु. का अतिरिक्त टैक्स लाभ भी दिया जाता है। इस तरह एनपीएस में कुल 2 लाख रुपये तक निवेश पर टैक्स छूट का लाभ उठाया जा सकता है। जबकि म्यूचुअल फंड में टैक्स बेनिफिट निवेश के प्रकार और अवधि पर निर्भर करता है। हालांकि इक्विटी लिंक्ड बचत योजना (ELSS) म्यूचुअल फंड 1.5 लाख रु. तक टैक्स बेनिफिट प्रदान करता है।
  • लॉक इन पीरियड: एनपीएस आपकी आयु 60 साल पूरी होने पर मैच्योर होता है। लेकिन आप चाहे तो मैच्योरिटी से पहले भी पार्शल विड्रॉल कर सकते हैं। खाता खुलवाने के 3 साल बाद 25 फीसदी तक पैसे निकाल सकते हैं। ये पार्शल विड्रॉल एनपीएस की पूरी अवधि के दौरान सिर्फ तीन बार की जा सकती है। वहीं ELSS (3 साल लॉक-इन पीरियड) को छोड़कर ज्यादातर म्यूचुअल फंड ओपन एंडेड होते हैं, यानी आप कभी भी पैसे निकाल सकते हैं।
  • रेगुलेशन: NPS को पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) रेगुलेट करता है, इसलिए धोखाधड़ी की संभावना कम है। जबकि म्यूचुअल फंड को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा रेगुलेट किया जाता है। हालांकि दोनों बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करते हैं।
  • रिटर्न: म्युचूअल फंड बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है इसलिए इसमें एनपीएस की तुलना में जोखिम भी अधिक होता है। आमतौर पर एनपीएस 10-12% का रिटर्न देता है जबकि म्यूचुअल फंड में लॉन्ग टर्म निवेश करने पर 14-16% का रिटर्न प्राप्त हो सकता है।

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NPS या MF: हमारी सलाह

  • इस तरह आप जान ही गए होंगे कि एनपीएस उन लोगों के लिए निवेश का बेहतर विकल्प है जो रिटायरमेंट के बाद हर महीने एक निश्चित राशि पेंशन के रूप में प्राप्त करना चाहते हैं। वहीं अगर आप रिटायरमेंट के आलावा शादी, बच्चों की शिक्षा जैसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए पैसे बचाना चाहते हैं और पूरी राशि एक साथ निकालना चाहते हैं, तो आप म्यूचुअल फंड (एमएफ) में निवेश कर सकते हैं।
  • ज्यादातर म्यूचुअल फंड ओपन एंडेड होते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल इमरजेसी फंड की तरह किया जा सकता है। जबकि एनपीएस में उन लोगों को निवेश करना चाहिए जो अपने रिटायरमेंट के लिए निवेश करना चाहते हैं। साथ ही टैक्स बेनिफिट चाहते हैं और उनकी जोखिम लेने की क्षमता कम है, उनके लिए एनपीएस बेहतर निवेश विकल्प है।
  • म्यूचुअल फंड और एनपीएस दोनों बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव के चलते रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है। हालांकि म्यूचुअल फंड की तुलना में एनपीएस में गारंटीड रिटर्न मिलने की संभावना अधिक होती है। इस तरह आप अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर चुन सकते हैं कि आपको किसमें निवेश करना है।

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