सेविंग स्कीम

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए NPS है बढ़िया ऑप्शन, पेंशन समेत मिलते हैं कई लाभ

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए NPS है बढ़िया ऑप्शन, पेंशन समेत मिलते हैं कई लाभ
Bharti
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रिटायरमेंट के बाद आपको किसी पर निर्भर न रहना पड़े, इसलिए फाइनेंशियल प्लानिंग करनी ज़रूरी है। लोग अपने रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए तरह-तरह की स्कीम में निवेश करते हैं। इनमें से एक है, एनपीएस यानी नेशनल पेंशन स्कीम। यह एक ऐसी स्कीम है जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी वर्किंग लाइफ के दौरान इसमें नियमित रूप से योगदान कर सकता है। इसमें निवेश करने वाले कस्टमर को रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में नियमित आमदनी दी जाती है। यह स्कीम उन लोगों के लिए बढ़िया ऑप्शन साबित हो सकती है जो अपने रिटायरमेंट के लिए कॉर्पस बनाना चाहते हैं। तो आइए राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (National Pension Scheme) के बारे में डिटेल में जानते हैं:-

नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) क्या है?

एनपीएस सरकार द्वारा शुरू की गई एक कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम है। इसमें 18-70 साल तक की उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। एनपीएस में जमा की गई रकम रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में दी जाती है। इसमें आप मासिक या फिर सालाना पैसे जमा कर सकते हैं। न्यूनतम जमा राशि 1,000 रु. है। NPS में कस्टमर जितनी रकम निवेश करता है, उसके 40% से एन्युटी खरीदनी ज़रूरी होती है। शेष 60% राशि रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त मिलती है। जो रकम एन्युटी खरीदने के लिए इस्तेमाल की जाती है वो बाद में मासिक पेंशन के रूप में दी जाती है। इस तरह, आप जितनी ज्यादा रकम एन्युटी में लगाएंगे उतनी अधिक राशि आपको पेंशन के रूप में मिलेगी।

यह भी पढ़ें: NPS या PPF किसमें निवेश करना है बेहतर विकल्प?

NPS के लिए आवेदन का तरीका क्या है?

एनपीएस में शामिल होने के लिए कस्टमर को अकाउंट खुलवाना पड़ता है। अकाउंट ऑनलाइन या ऑफलाइन खोला जा सकता है। अगर आप ऑफलाइन अकाउंट खोलना चाहते हैं तो इसके लिए POP-SP (पॉइंट-ऑफ-प्रीसेंस सर्विस प्रोवाइडर) के पास जाना होगा, POP कोई बैंक या पोस्ट ऑफिस हो सकता है। यहां आपको एक PRAN एप्लीकेशन फॉर्म दिया जाएगा, जिसे भरकर KYC दस्तावेज़ों के साथ जमा करना होगा। रजिस्ट्रेशन के वक्त आपको अपना पहला कॉन्ट्रिब्यूशन भी करना होगा।

इसके अलावा आप ऑनलाइन अकाउंट भी खोल सकते हैं। आप eNPS की वेबसाइट के ज़रिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आपको फॉर्म भरने के बाद सभी KYC दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।

टियर 1 और टियर 2 अकाउंट क्या है?

NPS में निवेश करने के लिए टियर 1 और टियर 2 के नाम से दो अकाउंट खोले जाते हैं। NPS टियर- 1 अकाउंट एक पेंशन अकाउंट है जिसे खोलना अनिवार्य है, जबकि टियर- 2 अकाउंट एक वॉलेंटरी सेविंग्स अकाउंट है, जिसे खोलना वैकल्पिक है। टियर-2 अकाउंट सिर्फ वही लोग खोल सकते हैं जिनके पास टियर- 1 अकाउंट है। एनपीएस टियर- 1 अकाउंट खोलने पर एक PRAN (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) दिया जाता है, जो पूरी अवधि दौरान समान रहता है। 

NPS से पैसा निकालने के लिए क्या नियम हैंं?

NPS में जमा पूरी रकम नहीं निकाली जा सकती, लेकिन आप उसमें से कुछ हिस्सा निकाल सकते हैं। इसे पार्शल विड्रॉल के नाम से जाना जाता है। कस्टमर एनपीएस स्कीम में शामिल होने के 3 साल बाद ही पार्शल विड्रॉल कर सकते हैं। पार्शल विड्रॉल के ज़रिए एनपीएस में जमा राशि में से 25% राशि ही निकाली जा सकती है। ये पार्शल विड्रॉल एनपीएस की पूरी अवधि के दौरान सिर्फ तीन बार की जा सकती है।

इसके अलावा एनपीएस से राशि निकालने को लेकर कुछ नियम तय किए गए हैं। आप कुछ विशेष मामलों में ही एनपीएस से पार्शल विड्रॉल कर सकते हैं जिनके बारे में नीचे बताया गया है:-

  • बच्चों की शादी के लिए
  • बच्चों के हायर एजुकेशन के लिए 
  • अपने नाम पर या जॉइंटली रेज़िडेंशियल घर या फ्लैट खरीदने/बनवाने के लिए (बशर्तें पैतृक संपत्ति के अलावा कस्टमर के नाम पर कोई और संपत्ति न हो)
  • गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए

एनपीएस से निकाली गई 60% राशि पर टैक्स नहीं लगता। इसमें कस्टमर को इनकमट टैक्स अधिनियम की धारा 80CCD (1B) और 80C के तहत टैक्स में छूट का लाभ मिलता है।

निष्कर्ष 

इस तरह आप ये तो जान गए होंगे कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की ज़रूरत को पूरा करने लिए एनपीएस एक बेहतरीन स्कीम है। इसमें अच्छा रिटर्न मिलने के साथ ही टैक्स बेनफिट का भी लाभ मिलता है। इतना ही नहीं, एनपीएस को पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) रेगुलेट करता है इसलिए यह सेफ माना जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि एनपीएस शेयर बाज़ार पर आधारित योजना है, जिस वजह से इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता। बाज़ार के उतार-चढ़ाव के मुताबिक मिलने वाला रिटर्न कम या ज़्यादा हो सकता है।

 

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