निवेश

इन टिप्स के ज़रिए कामकाजी महिलाएं अपने फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर बना सकती हैं

इन टिप्स के ज़रिए कामकाजी महिलाएं अपने फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर बना सकती हैं
Bharti
Bharti

पुराने समय से ही महिलाओं को एक गृहणी के रूप में देखा जाता रहा है, जिनका काम घर-परिवार संभावलना और चुल्हा-चौका करना है। लेकिन जैसे-जैसे समय बदल रहा है, महिलाओं की इस छवि में भी बदलाव आ रहा है। अब महिलाएं भी घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर नौकरी कर रहीं हैं, अपना बिज़नेस चला रहीं हैं। इस वजह से कामकाजी महिलाओं की संख्या में अब इज़ाफा होता हुआ दिखाई दे रहा है। अगर आप एक कामकाजी महिला हैं तो आपको अपने फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए, ऐसे में नीचे कुछ टिप्स दिए गए हैं जो ऐसा करने में आपकी मदद कर सकते हैं:-

इमरजेंसी फंड बनाना है ज़रूरी

नौकरी या अपना बिज़नेस करने वाली महिलाओं को शुरूआत से ही इमरजेंसी फंड तैयार करना चाहिए। इमरजेंसी फंड का लेना-देना न आपकी सेविंग्स से हैं, न ही इन्वेस्टमेंट से। यह उन दिनों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है, जब आपको अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ सकती है। इसमें नौकरी का छूट जाना, किसी बिमारी या दुर्घटना का घट जाना शामिल है।

सवाल यह है कि आपको कितना इमरजेंसी फंड जमा करना चाहिए है? आदर्श रूप से इमरजेंसी फंड में आपके 6 से 8 महीने के खर्च जैसे लोन की EMI, बिल, रेंट आदि को कवर करने की क्षमता होनी चाहिए। इमरजेंसी के लिए पैसे जोड़ते समय अपनी ज़रूरतों और खर्चों का ध्यान रखना ज़रूरी है। इमरजेंसी फंड को आप सेविंग्स अकाउंट या एफडी अकाउंट में जमा कर सकती हैं, जिनमें अधिक ब्याज मिलता है और ज़रूरत पड़ने पर आप इन्हें तुरंत निकाल सकती हैं।

यह भी पढ़ें: यंग मदर्स करती हैं ये फाइनेंशियल गलतियां, जानें इनसे निपटने का तरीका

क्रेडिट स्कोर बनाएं

अगर आप भविष्य में गाड़ी-घर लेना या किसी फाइनेंशियल गोल को पूरा करना चाहती हैं, तो आपको लोन लेना पड़ सकता है। लोन के मामले में आपका क्रेडिट स्कोर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह बताता है कि वित्तीय मामलों में आपका रिकॉर्ड कैसा है। ऐसे में अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाने पर ध्यान दें। जिन लोगों का क्रेडिट स्कोर काफी अच्छा है उन्हें लोन मिलने में आसानी होती है। ज़्यादातर बैंक व लोन संस्थान भी ऐसे आवेदकों को कम ब्याज पर लोन ऑफर करते हैं। बहरहाल, क्रेडिट स्कोर बनाने के लिए क्रेडिट कार्ड होना ज़रूरी है। अगर आपको कम इनकम, नौकरी प्रोफाइल जैसे कारणों की वजह से क्रेडिट कार्ड नहीं मिल रहा है, तो सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकती हैं। दूसरी ओर, अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड है लेकिन क्रेडिट स्कोर कम है, तो बिलों व ईएमआई का समय पर भुगतान करें, कम समये मे लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन न करने जैसी बातों का पालन कर आप अपने क्रेडिट स्कोर को बेहतर बना सकती हैं।

साथ-साथ रिटायरमेंट प्लानिंग करते चलें

रिटायरमेंट प्लानिंग आपकी प्रमुख फाइनेंशियल प्रेफरेंस में शामिल होनी चाहिए। महिलाएं अक्सर रिटायरमेंट प्लानिंग को नज़रअंदाज कर देती हैं। क्योंकि वह अपने रिटायरमेंट के लिए अक्सर अपने परिवार या बच्चों पर निर्भर रहती हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए, बल्कि पहले से ही अपने रिटायरमेंट के लिए पैसे जुटाना शुरू कर देना चाहिए। आप जितनी जल्दी अपनी रिटायरमेंट की प्लानिंग शुरू करेंगी, उतना अधिक समय आपको रिटायरमेंट फंड बनाने में मिलेगा। हर महीने अपनी सैलरी का कम से कम 10% हिस्सा रिटायरमेंट के लिए जमा करें। अगर सैलरी कम है तो छोटी रकम से भी जमा करना शुरू कर सकती हैं, जैसे-जैसे सैलरी में इज़ाफा होगा वैसे-वैसे रिटायरमेंट फंड में राशि बढ़ाते रहें।

यह भी पढ़ें: रिटायरमेंट में बेफिक्र रहना चाहते हैं तो उठाए ये पांच कदम

अपने लिए इंश्योरेंस कराना न भूलें

पैसा कमाना और बचाना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है अपने और अपनों के भविष्य के बारे में सोचकर बीमा कराना। लाइफ इंश्योरेंस व हेल्थ इंश्योरेंस जैसी पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य मेडिकल इमरजेंसी के समय आर्थिक समस्या से निपटना और मृत्यु के मामले में आपके परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। हेल्थ इंश्योरेंस के मामले में ज़्यादातर महिलाएं एंप्लॉयर्स इंश्योरेंस पर निर्भर रहती हैं। कंपनी की तरफ से की जाने वाली इन इंश्योरेंस पॉलिसी में कम सुविधाएं दी जाती हैं जो इमरजेंसी के वक्त कम पड़ सकती हैं। ऐसे में कामकाजी महिलाओं को ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का विचार करना चाहिए जिसमें उन्हें कम प्रीमियम पर अधिक कवरेज मिलता हो।

यह भी पढ़ें: अपने लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

मार्केट-आधारित निवेश विकल्पों में इन्वेस्ट करने पर विचार करें

अधिकतर महिलाएं अपने पैसों को जोखिम में डालने से कतराती हैं। वे अपने पैसे या तो घर पर रखना पसंद करती हैं या फिर सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न देने वाले विकल्पों जैसे की एफडी, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), पोस्ट ऑफिस डिपॉज़िट आदि में निवेश करती हैं। लेकिन इनमें मिलने वाली रिटर्न मार्केट आधारित विकल्पों की तुलना में काफी कम होता है। ऐसे में महिलाओं को गोल्ड इन्वेस्टमेंट, म्यूचुअल फंड, डेट फंड जैसी स्कीम में निवेश करने का विचार करना चाहिए।

 

अन्य ब्लॉग

पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन होता है, यानी इस लोन क...

Vandana Punj
Vandana Punj
NEFT क्या है? NEFT का फुल फॉर्म और यह कैसे काम करता है? जानिए सबकुछ

आज के इस आर्टिकल में हम NEFT के प्रमुख पहलुओं पर चर्...

Nikita
Nikita
Difference Between IMPS, NEFT & RTGS: फुल फॉर्म, ट्रांजैक्शन लिमिट, फीस और सर्विस टाइमिंग के साथ जानिए सबकुछ

आजकल, एनईएफटी, आरटीजीएस और आईएमपीएस जैसे विभिन्न ऑनल...

Nikita
Nikita