क्रेडिट कार्ड

क्रेडिट कार्ड कंपनियां कम कर रही हैं बेनिफिट्स, कार्ड होल्डर पर क्या पड़ता है असर

क्रेडिट कार्ड कंपनियां कम कर रही हैं बेनिफिट्स, कार्ड होल्डर पर क्या पड़ता है असर
Vandana Punj
Vandana Punj

क्रेडिट कार्ड प्रदाता द्वारा एक समय के बाद कार्ड पर दी जाने वाली सुविधाओं को कम कर देना, क्रेडिट कार्ड डिवैल्यूएशन कहलाता है। पिछले कुछ महीनों में क्रेडिट कार्ड डिवैल्यूएशन (Credit Card Devaluation) की कई खबरें सामने आई है। एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, फेडरल बैंक आदि जैसे कई बैंकों ने अपने क्रेडिट कार्ड के लाभ कम कर दिए हैं। लेकिन क्रेडिट कार्ड देने वाले बैंक व कंपनियां ऐसा क्यों करते हैं और इसका आम जनता पर क्या असर पड़ता है। आइए जानते हैं:

क्रेडिट कार्ड लाभों में बदलाव क्यों?

    • क्रेडिट कार्ड देने वाले बैंक व कंपनियां कार्ड होल्डर को रिवॉर्ड, पॉइंट समेत लाउंज एक्सेस और कैशबैक जैसे कई लाभ देते हैं, हालांकि वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती कीमतों के कारण कार्डप्रदाताओं द्वारा दी जाने वाली ये सुविधाएं अब उन्हें काफी महंगी पड़ रही है। बढ़ती मंहगाई और कॉम्पटिशन के बीच ग्राहक की मांगों को पूरा करना क्रेडिट कार्ड कंपनियों के लिए एक चुनौती है। जिसे पाटने के लिए कार्डप्रदाता समय-समय अपने कार्ड से संबंधित रणनीतियां बदलते रहते हैं। यानी समय और ग्राहक की मांग के अनुरुप कार्डप्रदाता क्रेडिट कार्ड से संबंधित नियम बनाते हैं और उसे बदलते हैं।

उदाहरण से समझें- कोविड-19 के समय यात्रा ठप्प हो गई थी। जिसके चलते कार्डप्रदाता यात्रा पर रिवॉर्ड न देकर ऑनलाइन खरीदारी पर रिवॉर्ड ऑफर कर रहे थे। लेकिन महामारी शांत होने के बाद लोगों का आवागमन फिर से शुरू हुआ, जिसके चलते हवाई-रेवले बुकिंग और लाउंज एक्सेस की मांग बढ़ी। इसे देखते हुए कार्डप्रदाताओं को एक बार फिर अपनी कार्ड पॉलिसी में बदलाव करने की जरूरत महसूस हुई और यात्रा पर रिवॉर्ड, लाउंज एक्सेस ऑफर किया जाने लगा।

    • इसके अलावा अलग-अलग तरह के क्रेडिट कार्ड यूजर जैसे- ट्रांजेक्टर, रिवॉल्वर और ईएमआई यूजर, लाभ कटौती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ट्रांजेक्टर जो हर महीने अपने कार्ड का पूरा भुगतान करते हैं। रिवॉल्वर वो यूजर होते हैं, जो अपने कार्ड बिल का पूरा भुगतान नहीं करते और बकाया राशि अगले महीने के लिए ट्रांसफर करवा लेते हैं। आमतौर पर रिवॉल्वर यूजर कार्डप्रदाता के लिए फायदेमंद होते हैं क्योंकि उनसे कार्डजारीकर्ता को ब्याज की प्राप्ति होती है। इस तरह कार्ड देने वाले बैंक व कंपनियां अपने ग्राहक के हिसाब से भी अपनी कार्ड पॉलिसी को बदलते रहते हैं।

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कार्डहोल्डर पर पड़ने वाला असर

  • सभी बैंक व कंपनियां एक समय के बाद अपनी कार्ड पॉलिसी में बदलाव करते हैं, लेकिन कौन से कार्ड में कितना बदलाव आया यह मायने रखता है। जैसे कई सारे बैंक शुरू में कार्ड पर अलग-अलग रिवॉर्ड देते हैं और जब उनका लक्ष्य पूरा हो जाता है, वह ग्राहकों से कार्ड तो वापस नहीं ले सकते इसलिए अपनी कार्ड रणनीति में बदलाव कर देते हैं।
  • आरबीआई के नियमानुसार कार्डप्रादाता द्वारा किसी भी तरह का बदलाव करने से 30 दिन पहले कार्डहोल्डर को इसके बारे में जानकारी देना अनिवार्य है। इन जानकारियों में ज्वॉइनिंग फीस, वार्षिक फीस, रिवॉर्ड आदि में किसी भी तरह का बदलाव शामिल है।   
  • कार्ड से संबंधित कोई भी बदलाव नए और पुराने सभी तरह के कार्डहोल्डर पर लागू हो सकता है।

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